सस्पेडं अफसरों ने नेताओं के सिर फोडा घोटाले का ठीकरा

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देहरादून सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा नेशलन हाईवे- 74 के घोटाले की जांच को सीबीआई से कराने के आदेश नेे नौकरशाहों और राजनेताओं की नींद में खलल पैदा कर दिया है। इस आदेश के साथ ही सत्ता के गलियारों में एक बार फिर से हडकंप मच गया है। सूत्रों की माने तो इस घाटाले में कई सफेदपोश नेताओं के नाम भी समाने आने के संकेत मिल रहे हैं। वे कौन हैं, इस राज से पार्दा उठना बाकी है, लेकिन सस्पेंड अधिकारियों के सफेदपोशों के इस घोटाले में शामिल होने के साफ संकेत दे दिए हैं।

एनच घोटाले की जांच को सीबीआई से कराने के आदेश के बाद से त्रिवेन्द्र सिंह रावत सरकार इन दिनों खासा सुर्खियों में है। देश-विदेश की मीडिया में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश से देहरादून से दिल्ली तक सत्ता के गलियारे में जबरदस्त हलचल पैदा हो रखी है। लेकिन कोई भी सफेदपोश नेता इसे साफ जाहिर करने से कतरा रहा है। राजनेताओं के माथों पर चिंता की लकीरें उठना स्वाभाविक है।
गौरतलब है कि प्रदेश के उधमसिंह नगर में एनएच-74 में फोरलेन के निर्माण का कार्य करने का फैसला लिया गया है। इसमें जनपद की चार तहसीलों काशीपुर, बाजपुर, जसपुर और सितारगंज की सैंकडों कृषि भूमि को एक सोची-समझी साजिश के तहत अकृषिय भूमि में तबदील कर करोडों रुपए की चपत सरकार को लगाई गई। मिलीभगत से किसानों को भी लाभ पहुंचाया गया, लेकिन कम मात्रा में। कुमाउं मंडालायुक्त एंव एसआईटी की जांच में अभी तक करीब 240 करोड रुपए के घोटाले की बात सामने आ चुकी है। इस घोटालें में लिप्त सभी छः अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से संबंधित मंडलों के मंडलायुक्त कार्यालयों में अटैच कर दिया गया है, जिससे जांच प्रभावित न हो। घोटाले में शामिल सुरेंद्र सिंह जंगपांगी जनपद अल्मोडा में अपर जिलाधिकारी के पद पर तैनात हैं। इसके अलावा जगदीश लाल अपर जिलाधिकारी चमोली हैं जबकि भगत सिंह फोनिया घनसाली और एनएस नगन्याल नैनीताल जनपद में उपजिलाधिकारी हैं। दिनेश प्रताप सिंह एंव अनिल कुमार शुक्ला यूएस नगर में विशेष भ्ूामि अध्यपति अधिकारी के पद पर हैं। एक एसडीएम हिमालय सिंह मर्तोलिया इसी वर्ष जनवरी में सेवानिवृत्त हुए हैं। इनके उपर भी जांच के बादल मंडरा रहे हैं।
सस्पेंड अधिकारी ख्ुाद को बचाने के लिए अपनी काल डिटेल का सहारा लेने एंव साक्ष्य जुटाने में लग गए हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक जांच अधिकारी ने बताया कि घोटाले में जो भी हुआ है, वो नेताओं और मंत्रियों के दबाव में किया गया है। सीबीआई की जांच शुरु होने पर जल्द ही इस पर से पर्दा उठेगा कि आखिर वो कौन सफेदपोश हैं जिन्होंने अपने तुच्छ से लालच के लिए देवभूमि का नाम कलंकित किया है।

 

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