टीडीसी घोटाले में बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचे आरोपी अफसर

 

 


टीडीसी बीज घोटाले में एसआईटी ने आज अभिलेखों का गहन अध्ययन किया। हालांकि आज टीडीसी घोटाले से जुड़े अफसरों को नोटिस देकर बुलाया गया था, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई अफसर बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचा था। हालांकि आरोपियों को 15 अक्टूबर तक बयान दर्ज कराने के लिए समय दिया गया है।
एसपी सिटी देवेंद्र पिंचा ने बताया कि टीडीसी में वर्ष 2015 16 में गेहूं बीज बेचने में 16 करोड़ का घाटा हुआ था। जिसकी शासन ने चार सदस्यीय टीम से जांच कराई थी। जांच में घोटाला सामने आने पर टीडीसी के उप मुख्य कार्मिक अधिकारीध्वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सीके सिंह ने 28 जून को दस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 409 एवं 420 के तहत पंतनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की जांच पंतनगर के प्रभारी निरीक्षक संजय पाठक को सौंपी गई थी। बाद में शासन ने श्री पिंचा के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर दी। बताया कि एक नामजद आरोपी की मौत होने के कारण नौ लोगों को नोटिस जारी करके बयान दर्ज कराने को बुलाया गया था। सुबह से ही एएसपी पिंचा व एसआईटी की टीम के साथ अभिलेखों का अध्ययन करते रहे। बुधवार को टीम बयान दर्ज कराने वालों का इंतजार करती रही, लेकिन पहले दिन खबर लिखे जाने तक कोई आरोपी बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचा।
एनएच 74 मुआवजा घोटाले में बुधवार को जसपुर व काशीपुर के कुछ तहसील कर्मियों के साथ ही किसानों के बयान दर्ज किए गए। एक रजिस्ट्रार कानूनगो के कलमबंद बयान दर्ज कराने की तैयारी चल रही है।
बुधवार को एनएच 74 मुआवजा घोटाले की जांच कर रही एसआईटी कुछ अधिक सक्रिय नजर आई। एसपी क्राइम कमलेश उपाध्याय ने बंद कमरे में एसआईटी के सदस्यों से लंबी गुफ्तगू की। इस दौरान सीओ सिटी स्वतंत्र कुमार के साथ एक रजिस्ट्रार कानूनगो नजर आए। बताया गया कि उनके हस्ताक्षर मिलान के लिए संग्रहीत किए गए हैं। यह भी चर्चा है कि रजिस्ट्रार कानूनगो के एसआईटी कलमबंद बयान दर्ज करा सकती है। बुधवार को एसआईटी ने फिर से जसपुर व काशीपुर के किसानों के साथ ही कुछ तहसील कर्मियों के बयान दर्ज किए। दरअसल, एसआईटी को किसी आरोपी की गिरफ्तारी से पहले मजबूत साक्ष्यों को जुटाना जरूरी है, क्योंकि कोर्ट में आरोप पत्र पेश करने के लिए साक्ष्यों का होना बेहद जरूरी है। एसआईटी हर तरह के साक्ष्य जुटाने में लगी है।
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