सड़क पर भीख मांगता बचपन…क्या यही है इनका जीवन..?

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देहरादून । दून की सड़कों पर रोजाना आपको यूं तो कई भीखारी दिख जाएंगे लेकिन यह जानकर ताज्जुब होगा की उनमें से एक तिहाई की उम्र 18 साल से भी कम है। देश के दूसरे हिस्सों से गरीबी से बचने की कोेशिश में बच्चे देहरादून जैसे शहर में आते हैं और यहां भीख मांगने लग जाते हैं। इनमें से कुछ घर से भागकर आते हैं और कुछ परिवार के साथ रहकर भीख मांगते हैं। ज्यादातर बाल भिखारी व्यस्त चौराहों, बाजारों, धर्मिंक स्थलों, रेलवे स्टेशन जगहों पर होते हैं। ऐसी व्यस्त जगहों पर भीख मांगने से उन्हें ज्यादा से ज्यादा पैसे मिलने की उम्मीद होती है। कई गरीब परिवार मानते है कि उनके पास बच्चों को भीख मांगने में लगाने के अलावा और कोई चारा नहीं है। पुलिस और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि हर साल हजारों बच्चों को अगवा कर लिया जाता है और उन्हें भीख मांगने पर मजबूर किया जाता है, ताकि वो कमजोर दिखे और उन्हें सहानुभूति मिल सके। बाल आधिकार  कार्यकर्ताओं का कहना है कि भीख माफिया  बच्चों को विकलांग बना देते है क्योंकि विकलांग बच्चों को ज्यादा भीख मिलती है। सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक इनमें से कई बच्चे नशीली दवाओं के आदि बन जाते हैं और यौन शोषण के भी शिकार होते हैं। इन बच्चों की सुरक्षा और इनकी हालत में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने कोई कानून नहीं बनाया है। 55 साल पुराने एक कानून के मुताबिक दिल्ली सहित भारत के कई शहरों में भीख मांगना गैर कानूनी है और पुलिस ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती  है जो भीख मांगता पाया जाए। लेकिन ये सारी बातें कानूनी किताब तक ही सीमित रहे गई है। शासन-प्रशासन इस गंभीर समस्या के प्रति बिल्कुल उदासीन नजर आता है।

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