बागियों की कार्यकर्ताओं पर मजबूत पकड़ छुडा रही पसीने

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चुनाव सिर पर होने के बावजूद कांगे्रस में सत्ता और संगठन के बीच मतभेद होने के चलते कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में उत्साह नही देखने को मिल रहा है। भाजपा के खिलाफ प्रचार कर रही कांगे्रस के लिए कार्यकर्ता जुटाना भी भारी पड़ रहा है। कांग्रेस की प्रदेश में चलाई जा रही सतत संकल्प यात्रा के रंग भी फिके नजर आ रहे है, जबकि भाजपा की परिवर्तन यात्रा में भाजपा के कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। उधर बड़ी तादाद में कांग्रेस के बागी कार्यकर्ता अब भी बागी विधायकों की गणेश परिक्रमा करते नजर आ रहे है। बागी विधायकों की कार्यकर्ताओं पर मजबूत पकड़ का खामियाजा कांग्रेस को उठाना पड़ रहा है। जिसका नुकसान कांग्रेस को चुनाव में भी होगा वर्तमान में राजनीतिक गलियारों में यह भी कयास अभी से लगाए जा रहे है।

जब हरीश रावत सरकार को बर्खाश्त किया गया था उस दौरान भी कांगे्रस की लोकतंत्र बचाओ यात्रा सफलता पायदान के स्पर्श से काफी पीछे रह गई थी। उस समय भी कांग्रेस में सत्ता और संगठन के बीच विवाद को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा था। उसी दौरान भाजपा की पोल खोलने के अभियान में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जो एकजुटता दिखानी चाहिए थी वह अभी दूर की कौड़ी दिखाई देती रही। उसके बाद जंब हरीश रावत की सरकार राज्य में दोबारा स्थिापित हुई और अब चुनाव सिर पर है किन्तु कांगे्रस कार्यकर्ताओं का निराशाजनक व्यवहार नेताओं को परेशानी बढ़ाने का काम कर रहा है। आधे कांग्रेसी बागी विधायकों की गणेश परिक्रमा करने पर लगे है। जिसके चलते कई विधानसभा क्षेत्रों में कांगे्रस में ऊहापोह की स्थिति देखने को मिल रही है। कांगे्रेस की सबसे बड़ी विडबंना यह है कि पार्टी के भीतर अभी भी बागी विधायकों के समर्थकों की अच्छी खासी तादात है। वैसे भी पार्टी के भीतर बागी विधायकों का कद किसी से छिपा नहीं था। बागियों की पार्टी में अच्छी खासी पकड़ थी और वह कांगे्रस के कद्दावर विधायकों में गिने जाते रहे हैं। यह वह विधायक थे जो अपने दम पर चुनाव जीत कर आए थे। ऐसे में उनके महत्व को सहज ही समझा जा सकता है।

कांगे्रस से बागी हुए विधायकों की ताकत का अंदाजा इस बात से भी हो जाता है कि उनकी पकड़ पार्टी के करीब-करीब सभी संगठनों पर थी। ऐसे में उनके अलग होने से पार्टी को विधानसभा चुनाव में भारी नुकसान होना तय माना जा रहा है। यही कारण है कि कांग्रेस की सतत संकल्प यात्रा कई क्षेत्रों में जनता के उपर अपना रंग नही जमा पा रही है। राजनितिक गलियारों में चर्चा यह भी है कि कांगे्रस नेता जितना बागी विधायकों पर निशाना साधा रहें हैं, उतना वह पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो कांगे्रस को बागियों पर हमले के बजाए उन्हें वापस लाने के लिए हर स्तर पर जोर आजमाइश करनी चाहिए थी। अब हालत यह है कि कांग्रेस भाजपा पर कोई प्रभावशाली राजनितिक वार नही कर पा रही है। चुनाव नजदीक होने के बावजूद भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह नही दिखने को मिल रहा है।

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