सुप्रीम कोर्ट का प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को करारा झटका, निरस्त किए काउंसिलिंग के दाखिले

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सुप्रीम कोर्ट ने एमबीबीएस और डेंटल में मनमाने तरीके से प्रवेश लेने वाले मध्य प्रदेश के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को करारा झटका देते हुए प्राइवेट कॉलेजों द्वारा अलग-अलग कराई गई काउंसलिंग व प्रवेश निरस्त कर दिए हैं। बता दें कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि मध्य प्रदेश के मामले में दिया गया है, लेकिन यह फैसला देशभर के सभी राज्य सरकारों और उनके यहां स्थित प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों पर लागू होगा।
न्यायमूर्ति एआर दवे की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने ये आदेश प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के खिलाफ दाखिल मध्य प्रदेश सरकार की अवमानना याचिका निपटाते हुए दिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, उनके फैसले का मंतव्य था कि नीट के रिजल्ट के आधार पर सिर्फ राय सरकार ही संयुक्त काउंसलिंग कराएगी। वे (पीठ) पुनः आदेश देते हैं कि मेडिकल की सभी सीटों के लिए राय सरकार ही केंद्रीकृत काउंसलिंग कराएगी। उसी से सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों की सीटें भरी जाएंगी।

अगर किसी कॉलेज या विवि ने काउंसलिंग कर मेडिकल सीट पर कोई प्रवेश लिया गया है तो वे तत्काल प्रभाव से रदद किए जाते हैं। हालांकि कोर्ट ने आदेश का उल्लंघन करने वाले निजी कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई की मांग ठुकरा दी और उन्हें अवमानना नोटिस से मुक्त कर दिया। राज्य सरकार की ओर से पेश एडीशनल सॉलीसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि पहले दौर की काउंसलिंग राज्य सरकार ने ही कराई थी और वह नए सिरे से दोबारा पूरी प्रक्रिया कराने को तैयार है। 30 सितंबर तक प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी जो प्रवेश की अंतिम तारीख है।

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