चोटिल गायों का ईलाज निस्वार्थ भाव अपने खर्च से कर रहे – पशुपालन विभाग मौन

 

कुलदीप राणा/रुद्रप्रयाग
कहते  हैं  गाय की  सेवा  सबसे  बड़ा  धर्म  है ,पिछले दो माह से रुद्रप्रयाग नगर में खुरपक्का बीमारी से पीडित तथा चोटिल गायों का नगर के व्यापारी द्वारा निस्वार्थ भाव से अपने स्वयं के खर्च से ईलाज किया जा रहा है। वे हर रोज 8 से 10 बीमार व चोटिल गायों का ईलाज कर रहे हैं। इस कार्य में अभी तक सुरेन्द्र सिंह बिष्ट के 40 हजार के करीब खर्च आ चुका है। जो भी इनके इस कार्य को देख रहा है तारीफ किए बिना नहीं थक रहा है किन्तु सरकारी स्तर से उन्हें सहयोग नहीं मिल पा रहा है। बावजूद वे अपने मिशन में लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
एक तरफ गौ धर्म की बड़ी बड़ी बातें करने वाले धर्माचार्यो और गौ संगठन इन बेजुबान गायों की चित्कार से अंजान बैठे हैं तो वहीं हमारा सरकारी पशुपालन विभाग खुद संसाधनों का रोना रो रहा है। विभाग के पास न तो पर्याप्त दवाईयां हैं और न पूरा स्टाफ। वहीं दूसरी तरफ नगर पालिका भी बीमार गायों के लिए एक सुरक्षित स्थान तक का चयन नहीं कर पाई है। स्थानीय लोगों द्वारा नगर पालिका से पूर्व में भी काॅजीहौज के निर्माण करने की गुहार लगाई थी लेकिन इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं की गई। वहीं नगर के व्यापारी सुरेन्द्र सिंह बिष्ट तथा उनकी टीम द्वारा आवारा बेजुबान पशुओं का लगातार ईलाज किया जा रहा है। श्री बिष्ट का यह कदम कहीं ना कहीं उस सिस्टम को भी आईना दिखा रहा है जो इस कार्य के लिए तैनात किया गया है और उस समाज के लिए भी जो सत्संग से लेकर तमाम तरह की कथाओं में इन गायों के संरक्षण की बड़ी-बड़ी बाते करते नहीं थकते हैं।

बतौर बिष्ट का कहना है कि उनके सामने सबसे बड़ी जो समस्या आ रही है वह यह है कि जब हम गायों का ईलाज कर रहे हैं तो बरसात में पुनः बारिश तथा कीचड़ जा रहे हैं जिससे वे जल्दी ठीक नहीं हो पा रही हैं। अगर कहीं एक स्थान पर बीमार गायों का रहने के लिए पालिका स्थान देती तो वे जल्दी ठीक हो जाती। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोग दूध न देने वाले गायों को बाजार की गंदगी में मुँह मारने के लिए छोड़ दे रहे हैं। गाय को माता कहने वाला समाज ही उसकी बेकदरी कर रहा है तो वास्तव में यह शर्मनाक हैं। उन्होंने कहा कि गायों को बाजारों में छोड़ने वालों के खिलाफ प्रशासन को कड़ी कार्यावाही करनी चाहिए।

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