त्रिवेन्द्र सरकार मैं संपादक राजीव लोचन साह के साथ धक्का-मुक्की शर्मनाक

 

 

 

उत्तराखंड को लेकर चिंतित रहने वाले सक्रिय पढ़े-लिखे जन आंदोलनों से जुड़े रहने  वाले । ‘नैनीताल समाचार’ के सम्पादक। अपनी बात कहने के लिए उन्हें भी डेढ़ घन्टे लाइन में लगना पड़ा और वे लगे क्योंकि उन्हें अपनी बात कहनी थी। बात जो दरअसल हम सबकी थी। बीजेपी नेता ने अपने गुंडों से उन पर हमला करा दिया। सोचिए, जिनकी कोई सार्वजनिक पहचान नहीं, उन आम लोगों खासकर आदिवासियों के साथ क्या सुलूक किया जाता होगा। बहुत अपमान महसूस हो रहा है और शर्मिंदगी इस मुल्क के लोगों पर भी कि लुटेरों को छाती पर बैठा लिया। राजीव लोचन साह  पर हमला होना इस दौर में आपके जीवित होने का प्रमाण है जबकि बहुत से बुद्धिजीवी उसी पहाड़ पर जनता और प्राकृतिक संसाधनों की लूट के पक्ष में तर्क गढ़ते रहते हैं। याद आ रहा है कि जीडी अग्रवाल, भरत झुनझुनवाला और राजेन्द्र सिंह के साथ भी इसी तरह गुंडागर्दी कराई गई थी। यह भी कि लीलाधर जगूड़ी जैसे ‘बाइज़्ज़त’ पहाड़ी दलाल माफिया के साथ खड़े थे।

धौलादेवी के ब्लॉक कार्यालय में पंचेश्वर बाँध को लेकर चल रही जन सुनवाई में उस वक़्त बेहद शर्मनाक स्थिति पैदा हो गयी, जब अपने नेता सुभाष पाण्डे के उकसाने पर भाजपाई गुंडों ने मेरे साथ धक्का-मुक्की की और मुझे बोलने से रोक दिया। भाजपाईयों के इशारे पर पुलिस ने धक्का मार मुझे हॉल से बाहर निकाल दिया। उस वक़्त गोविन्द सिंह कुंजवाल और जिलाधिकारी अल्मोड़ा सहित तमाम जन प्रतिनिधि, अधिकारी और डॉ शमशेर सिंह बिष्ट व विमल भाई जैसे कार्यकर्ता हाल में मौजूद थे।
मैं जन सुनवाई में किसी तरह का सक्रिय विरोध करने नहीं गया था, बल्कि यह तर्क रखने गया था कि 5,000 मेगावाट बिजली बनाने के लिये हजारों लोगों की ज़िन्दगी तबाह करना या प्रकृति को नष्ट करना जरूरी नहीं है। 5, 000 छोटी परियोजनाओं से यह काम बेहतर ढंग से किया जा सकता है। हम लोग ‘आज़ादी बचाओ आंदोलन’ की मदद से इसी डूब क्षेत्र में पनार के पास रस्यूना गाँव में स्थानीय ग्रामीणों की प्रोड्यूसर कंपनी ‘सरयू हाइड्रो इलेक्ट्रिक पॉवर कम्पनी’ बना कर एक मेगावाट की जल विद्युत परियोजना बनाने का प्रयोग कर रहे हैं, जिसमें कम्पनी के सदस्य 150 परिवारों में प्रत्येक को घर बैठे 12,000 रु प्रति माह मिलने का अनुमान है। परियोजना में रोजगार भी क्षेत्र के लोगों को मिलेगा और पलायन रोकने का एक तरीका मिलेगा। मैं अपनी यही बात रखने के लिए डेढ़ घंटे लाइन में लगा रहा। अपनी बारी आने पर ज्यों ही मैंने माइक पकड़ा, सुभाष पाण्डे, जो हाल-हाल तक यूकेडी में थे, ने आपत्ति की कि डूब क्षेत्र के बाहर के लोग नहीं बोल सकते। उनके यह कहते ही भाजपा के एक दर्जन से अधिक गुंडे मुझ पर झपट पड़े। जबकि मुझसे पहले पी सी तिवारी सहित डूब क्षेत्र के बाहर के अनेक लोग बोल चुके थे। मजेदार बात यह है कि स्वयं सुभाष पाण्डे डूब क्षेत्र के नहीं हैं।
पच्चीस साल पहले टेहरी बाँध के विरोध में चल रहे आंदोलन में डॉ बी डी शर्मा जैसे विख्यात आंदोलनकारियों को पुलिस ने बेरहमी से पीटा था। लेकिन जोर जबर्दस्ती कर बाँध बना ही दिया गया। उसके दुष्परिणाम हम झेल रहे हैं। आज फिर हम एक और जन सुनवाई का ढकोसला देख रहे हैं।

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