आज से लागू हुआ उरेरा, धोखा दिया तो जाएंगे जेल

 

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देहरादून।  उत्तराखंड में रियल एस्टेट एक्ट आज से प्रभावी हो जाएगा। यदि बिल्डर्स ने आवासीय परियोजनाओं के नाम पर उपभोक्ताओं के साथ धोखा किया तो तीन साल तक जेल और जुर्माने भी भरना पड़ेगा। कार्रवाई के लिए रियल एस्टेट नियामक आयोग और अपीलीय प्राधिकरण भी गठित कर दिए गए हैं।

कागजों पर उपभोक्ताओं को सपनों का घर दिखाकर कुछ और थमा देने की कलाकारी अब नहीं चलेगी। राज्य में रियल एस्टेट एक्ट प्रभावी होने के बाद बिल्डर्स के लिए गलत सूचना देकर फ्लैट व भवन बेचना संभव नहीं होगा। इतना ही नहीं, निर्धारित समय के बाद भवन देने पर बिल्डर को कारावास के साथ ही आर्थिक दंड भी भुगतना पड़ सकता है।

गौरतलब है कि अधिकतर मामलों में बिल्डर की ओर से बनाए गए अपार्टमेंट व फ्लैट शुरुआती दौर में दिखाए गए मॉडल से बिल्कुल भिन्न होते हैं। इसके अलावा समय से फ्लैट न देना और घटिया निर्माण सामग्री को लेकर भी विवाद होते रहते हैं।

बिल्डरों की इस मनमानी से निपटने के लिए अभी तक कोई कानून नहीं था। केंद्र ने देश भर में बढ़ रही इस तरह की घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार रियल एस्टेट एक्ट बनाया। राज्यों को इसके लिए अपने- अपने स्तर से नियम बनाने को कहा गया था। उत्तराखंड शासन ने बीते सप्ताह ये नियम तय कर जारी कर दिए।

आवासीय व व्यावसायिक निर्माण संबंधी शिकायतों को सुनने के लिए नियामक आयोग का गठन किया गया है। इसमें एक अध्यक्ष व दो सदस्य रखे गए हैं। मुख्य सचिव स्तर के सेवारत अथवा सेवानिवृत अधिकारी इसके अध्यक्ष होंगे। सेवारत अथवा सेवानिवृत सचिव व जिला जज इसके शेष दो सदस्य होंगे। आयोग के निर्णय को अपीलीय न्यायाधिकरण में चुनौती दी जा सकती है। न्यायाधिकरण के अध्यक्ष हाईकोर्ट के सेवानिवृत जज होंगे। इसके अलावा इसमें एक जिला जज और तकनीकी विशेषज्ञ इसके सदस्य होंगे।

उत्तराखंड रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) रूल्स- 2017 के प्रमुख बिंदु –

पांच सौ वर्ग मीटर या आठ अपार्टमेंट से ज्यादा की आवासीय परियोजना का पंजीकरण नए नियमों के तहत कराना होगा।

रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण के आदेश की अवहेलना की स्थिति में बिल्डर को तीन वर्ष की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। वहीं रियल एस्टेट एजेंट और उपभोक्ता के लिए एक वर्ष की सजा का प्रावधान।

– परियोजना के साथ ही रियल एस्टेट एजेंट का पंजीकरण भी प्राधिकरण में कराना होगा।

– प्राधिकरणों में पंजीकृत होने वाली सभी परियोजना का विस्तृत ब्योरा संबंधित प्राधिकरण की वेबसाइट पर किया जाएगा जारी। इसके साथ ही स्वीकृत प्लान, लेआउट प्लान और परियोजना की विशेषताएं आदि की जानकारी भी सार्वजनिक करनी होगी।

– पंजीकरण के लिए पैन कार्ड, ऑडिटेट बैलेंस शीट, खुले पार्किग क्षेत्रों की संख्या, भू- अभिलेख और भू- स्वामी के साथ करारनामा और नियमानुसार शुल्क करना होगा जमा।

– पूर्वसूचित समयसीमा में निर्माण कार्य पूरा न करने पर प्रोमटोर उपभोक्ता को या अन्य स्थिति में उपभोक्ता प्रोमोटर को ब्याज का भुगतान करेगा। इसकी दर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ब्याज दर से दो फीसद ज्यादा होगी।

आवास के लिए ग्राहकों से ली गई अग्रिम धनराशि का 70 प्रतिशत अलग बैंक में रखना होगा और इसका इस्तेमाल केवल निर्माण कार्यो में ही किया जा सकेगा।

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