उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में आरोप.प्रत्यारोप की सियासत तेज

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उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों तू डाल.डाल मैं पात.पात की राजनीति चल रही है। कांग्रेस जहां केन्द्र को पानी पी.पीकर कोस रही है। वहीं भाजपा कांग्रेस के घोटालों की खोज में जुटी है। सूचना का अधिकार इसका प्रमुख हथियार बन रहा है। इन सूचना माध्यमों से जिन मुद्दों पर चर्चा हो रही हैए उनमें 2013 की आपदा के बाद केदारधाम में हुए पुनर्निार्माण के साथ.साथ केन्द्र पोषित योजनाएं भी हैं। जिन पर प्रदेश सरकार लगातार श्रेय लेने की कोशिश कर रही है। इतना ही नहीं खनन और आबकारी जैसे प्रकरणों को भाजपा धारदार हथियार बनाकर कांग्रेस पर वार करने का मानस बना चुकी है। इस चुनाव 2016 में कई मुद्दों पर दोनों पार्टियों की पैनी निगाह है। दोनों पार्टियां अपने मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित कर रही हैं। दोनों पाटिर्यों का ध्यान जनता के बीच पैने तथा धारदार मुद्दे रखकर विरोधी पार्टियों को परास्त कर अपनी छवि बनाने का विशेष ध्यान कर रहा है। इसके लिए जहां कांग्रेस ने पीण्केण् को अनुबंधित कर रखा है। यह वही प्रशांत किशोर हैं जिन्होंने विहार में नीतीश कुमार की नैया पार लगाई थी। अब यही पीके उत्तराखंड में स्वयंसेवी लोगों की ढूंढ़ में लगे हुए हैं। कांग्रेस में स्वयंसेवी कहा मिलेंगे यह चिंतन का मुद्दा है। इसी प्रकार भाजपा ने लगभग एक दर्जन मुद्दों पर सूचना अधिकार अधिनियम के तहत अच्छी खासी जानकारियां जुटा ली हैं। जिसको आधार बनाकर कांग्रेस पर हमला बोला जाएगा। सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मुख्यमंत्री कार्यालय को भी टटोला गया है जहां चाय नाश्ते पर करोड़ों का वारा न्यारा हो चुका है। हालांकि यह सभी मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में होता हैए लेकिन यहां कम समय में ज्यादा खर्च हुआ हैए जो मुद्दा बनाया जा सकता है। इसी प्रकार मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर भी सूचना अधिकार अधिनियम के तहत अच्छी खासी जानकारी जुटायी गई है। भाजपा में कांग्रेस के घोषणाओं के साथ.साथ योजनाओं तथा टेंडर प्रक्रियों पर भी पैनी निगाह रखी है। यही स्थिति केन्द्र द्वारा मिलने वाले आर्थिक सहयोग की भी है जिस पर कांग्रेस हमलावर थी और भाजपा रक्षात्मक। भाजपा के मंत्रियों और अधिकारियों ने आंकड़ों के आधार पर अपनी बातें रखी हैंएजबकि कांग्रेस उसे महज शोशेबाजी बताती रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता कांग्रेस के आरोपों का लगातार आंकड़ों के आधार खंडन करते रहे हैंए जबकि मुख्यमंत्री लगातार आरोप लगा रहे हैं। कुल मिलाकर वर्तमान चुनाव आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच होने वाले हैं जिसके लिए दोनों दलों ने अभी से ही धारदार हथियार बनाने का काम शुरू कर दिया है।

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