उत्तराखंड बीजेपी मे करोडो रुपया विज्ञापन घोटाले का सकेत

0

 

भातरीय जनता पार्टी अन केन  प्रकरण चुनाव जितना चाहती है साम दाम दंड भेद और पैसा का प्रयोघ कर चुनाव हो रहे है सोशल साईट से लेकर समाचार पत्र   विज्ञपनो से भरे हुए है . जनता अपने पैसो के लिए रो रही है और उत्तराखंड मे मोदी से बड़े बड़े भासनो और वादों से लोग लुभावन वादे कर रही है वही प्रदेश मे हरीश रावत सरकार भी जनता के मुद्दों से भटक रही है . एक तरफ मोदी सरकार नोट बंदी की बात कर रही है वही दूसरी तरफ उत्तराखंड बीजेपी मे विज्ञपन घोटाले की अशंखा शुरू हो चुकी है एक तरफ केंद्र मे मोदी नोट बंदी की बात कर रहे है , वही उत्तराखंड विज्ञपन मे घोटाले कि खुशबू के संकेत आने शुरू हो चुके है …. उत्तराखण्ड में होने वाले विधनसभा चुनाव को लेकर आये कुछ सर्वो में भाजपा की जीत दिखाये जाने के बाद से प्रदेश के दर्जनों बड़े राजनेता बेवजह सीना फुलाकर राज्य में अपनी सरकार बनने के खुली आंखों से सपने देखने में लगे हुए हैं। हैरानी वाली बात तो यह है कि जो भाजपा उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार के खिलाफ हुंकार लगा रही है उसका एक राजनेता तो भ्रष्टाचार की सारी सीमायें ही लांघ गया और चर्चा है कि चुनाव को लेकर दिये जा रहे विज्ञापनों में भी वह कमीशन का खेल खेलने में लगा हुआ है। यही कारण है कि दर्जनों समाचार पत्रों ने भाजपा के चुनावी विज्ञापनांें को छापने से ही साफ इंकार कर दिया । क्योंकि उसमें जिस तरह से भ्रष्टाचार की बू आ रही है वह साबित कर रहा है कि सत्ता मे सरकार के आये बिना ही जब भाजपा का एक नेता चुनावी विज्ञापनों में भ्रष्टाचार करने का खेल पर्दे के पीछे रहकर खेल रहा है तो सत्ता आने के बाद वह क्या गुल खिलायेगा इसका अंदाजा अपने आप लगाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड में भाजपा सत्ता में आने के लिए लम्बे समय से छटपटा रही है और उसके चन्द दिग्गज नेता पर्दे के पीछे रहकर पार्टी के अन्दर ऐसा घमासान मचाये हुए हैं जिससे विधनसभा चुनाव में उत्तराखण्ड के अन्दर किसी भी सूरत में कमल ना खिल पाये। पार्टी के चन्द नेताओं के मन में मुख्यमंत्राी बनने का बड़ा सपना लम्बे समय से देखने में मिल रहा है लेकिन हाईकमान की ओर से उन्हें जो इशारा मिला उससे उन्हें इस बात का इल्म हो गया कि उन्हें किसी भी सूरत में सरकार आने पर मुख्यमंत्राी की कमान नहीं मिल पायेगी। अपनी इच्छा पूरी ना होते देख भाजपा के चन्द बड़े नेताओं ने केन्द्र से आने वाले नेताओं के सामने ऐसी हुंकार भर रखी है कि मानों वह पार्टी को चुनाव में जीतवाने के लिए कितने गम्भीर हो रखे हो लेकिन अन्दर खाने वह पार्टी के कुछ प्रत्याशियों के खिलापफ बगावत करने का खेल खेलने में जुटे हुए हैं जिससे उत्तराखण्ड के अन्दर भाजपा की सरकार बनने पर अब शंका उठनी शुरू हो गयी है। विधनसभा चुनाव में प्रचार प्रसार के लिए समाचार पत्रों में विज्ञापन देने का खाका तैयार किया गया। हालांकि चर्चा है कि इन विज्ञापनों में भी भाजपा का एक नेता कमीशनखोरी के खेल में पर्दे के पीछे रहकर खूब पैसे कमा रहा है। यही कारण है कि विज्ञापन देने का ठेका मिलने वाली एजेंसी समाचार पत्रों को छलकर उन्हें सरकारी दरो पर विज्ञापन देने का राग अलाप रही है और इस पूरे खेल के पीछे भाजपा का एक नेता बताया जा रहा है। चर्चा है कि विज्ञापन एजेंसी को दर्जनो समाचार पत्रों ने भाजपा का चुनावी विज्ञापन छापने से साफ इंकार कर दिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब भाजपा का एक नेता चुनावी विज्ञापनों में भी कमीशनखोरी करने के खेल में अपने कदम आगे बढ़ाये हुए है तो ऐसे में भाजपा का भ्रष्टाचार मुक्त सरकार देने के दावे पर अपने आप ही बड़ा ग्रहण लग रहा है। उत्तराखण्ड विधनसभा चुनाव को लेकर आये सर्वे से भाजपा के दर्जनो नेता बेवजह सीना फुलाये हुए नजर आ रहे हैं और उन्होंने भ्रम पाल लिया है कि उत्तराखण्ड में भाजपा सत्ता में आ रही है। भाजपा ने भी आवाम के सामने अपने घोषणा पत्र में ऐसा कोई वायदा नहीं किया कि जिससे की आवाम भाजपा को सत्ता में देखने के लिए ललायित हो रहा हो। उत्तराखण्ड से छन कर आ रही खबरों के अनुसार भाजपा की स्थिति काफी डावाडोल है। हरिद्वार में तो भाजपाा का सुपड़ा साफ होते हुए ही नजर आ रहा है। कुमाउ में भी भाजपा दमदार तरीके से चुनाव मैदान में दिखायी नहीं दे रही। राजधनी में कुछ सीटों पर कांग्रेस की स्थिति बलवान दिख रही है और भाजपा के ही कुछ नेता अपनो के साथ भीतरघात कर उन्हें चुनाव मैदान में हराने के लिए साजिशों का खेल खेलने में जुटे हुए हैं जिससे की उनकी राजनीतिक विरासत बची रह सके। अब भी अगर भाजपा के चन्द नेताओं ने चुनावी रणभूमि में सही अंदाज लेकर चुनाव लड़ने की रणनीति ना अपनायी तो भाजपा के लिए 2017 का चुनाव भी संकट भरा हो सकता है?

Facebook Comments

Random Posts