अब उत्तराखंड के पाई-पाई खर्च पर रहेगी केंद्र की सीधी नजर

(रविंद्र बड़थ्वाल)
प्रदेश में स्वास्थ्य, शिक्षा, शहरी-ग्रामीण विकास, समाज कल्याण समेत सभी केंद्रपोषित योजनाओं पर होने वाले पाई-पाई खर्च और लाभार्थियों तक पहुंच रहे लाभ की असलियत पर अब केंद्र सरकार की सीधी नजर होगी। इसके लिए केंद्र के निर्देश पर राज्य से लेकर जिला स्तर तक पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट (पीएफएमएस) को प्रभावी बनाया जा रहा है। सरकार द्वारा नए सिरे से मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता में राज्य सलाहकार समूह और वित्त सचिव अमित नेगी की अध्यक्षता में स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (एसपीएमयू) गठित की गई हैं।

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प्रदेश में केंद्रपोषित योजनाओं का पैसा कहां गया, लाभार्थियों तक पहुंचा या नहीं समेत खर्च की पूरी स्थिति केंद्र सरकार से छिप नहीं सकेगी। केंद्र की मोदी सरकार ने एकीकृत पीएफएमएस व्यवस्था के जरिये केंद्रीय योजनाओं के रूप में दी जाने वाली वित्तीय मदद के इस्तेमाल और प्रदर्शन का लेखा-जोखा रखने का बंदोबस्त किया है।
इससे केंद्रीय योजनाओं को अमल में लाने की प्रक्रिया भी एकीकृत रूप ले सकेगी। खासतौर पर मनरेगा, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना, समाज कल्याण की पेंशन योजनाओं समेत तमाम केंद्रपोषित योजनाओं पर होने वाले खर्च में भी पारदर्शिता आना तय है।
इस नई व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार ने राज्य को हिदायत देते हुए एसपीएमयू और डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (डीपीएमयू) के बारे में जरूरी निर्देश दिए थे। साथ में उक्त दोनों इकाइयों के कामकाज में तेजी के लिए राज्य स्तर पर सलाहकार समूह के गठन की गाइडलाइन दी थी। राज्य सरकार ने केंद्र की अपेक्षाओं के मुताबिक राज्य सलाहकार समूह और एसपीएमयू के गठन के अलग-अलग आदेश जारी किए।

मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह 17 सदस्यीय राज्य सलाहकार समूह के अध्यक्ष होंगे और वित्त, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सचिव, ग्राम्य विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, नियोजन, समाज कल्याण, सहकारिता, पंचायती राज के सचिव सदस्य होंगे।
इनके अलावा केंद्र सरकार के उपलेखा महानियंत्रक (पीएफएमएस), कोषागार निदेशक, एनआइसी निदेशक, आरबीआइ महाप्रबंधक, यूआइडीएआइ नोडल अधिकारी, राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति के सचिव, बैंकिंग सलाहकार और अपर सचिव वित्त भी बतौर सदस्य रहेंगे।

एसपीएमयू में अध्यक्ष वित्त सचिव अमित नेगी, समन्वयक अपर सचिव वित्त अरुणेंद्र सिंह चैहान, उप महालेखा नियंत्रक (पीएफएमएस), बजट अधिकारी, एसआइओ एनआइसी निदेशक, कोषागार व वित्त सेवाएं निदेशक, आइटीडीए निदेशक, स्टेट डाटा सेंटर सदस्य, बैंकिंग सलाहकार और अध्यक्ष की ओर से जरूरत के मुताबिक नामित कोई व्यक्ति सदस्य के रूप में रहेंगे।
पीएफएमएस के तहत 30 सितंबर तक सभी संबंधित संस्थाओं का पंजीकरण किया जाएगा। इसके साथ ही कोषागार कार्मिकों, विभागाध्यक्षों और आहरण वितरण अधिकारियों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। अगले वित्तीय वर्ष तक पीएफएमएस के तहत व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय हो जाएगी।

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