उत्तराखंड के पांच शहर भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील

 

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(विकास धूलिया)
पिछले कुछ दशकों में तेजी से हुए अनियोजित शहरीकरण ने भूकंप से होने वाले नुकसान के खतरे को अत्यधिक बढ़ा दिया है। आबादी के बढ़ते दबाव के कारण आवासीय योजनाओं में सुरक्षा मानकों का पर्याप्त ध्यान न रखे जाने से इस तरह के नुकसान की आशंका बढ़ गई है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इस तरह के खतरों के आकलन के लिए अर्थक्वेक डिजास्टर रिस्क इंडेक्स (ईडीआरआइ) परियोजना आरंभ की है।
इस परियोजना के तहत भूकंप के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील जोन पांच व चार में आने वाले देश के चुनिंदा 50 शहरों को लिया गया है, जिनमें उत्तराखंड के पांच शहर शामिल हैं। जनसंख्या दबाव के कारण पिछले कुछ सालों में छोटे-बड़े शहरों का तेजी से विस्तार हुआ है। इसने आवासीय योजनाओं के निर्माण में मानकों की अनदेखी के खतरे को भी बढ़ा दिया है।

आवासीय भवनों के निर्माण में लापरवाही से भूकंप जैसी आपदा के दौरान जान-माल के नुकसान की आशंका में भी इजाफा हुआ है।  इसी के मद्देनजर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अर्थक्वेक इंजीनियरिंग रिसर्च सेंटर, हैदाराबाद की तकनीकी मदद से एक परियोजना शुरू की है। इस परियोजना के अंतर्गत देश के भूकंप के लिहाज से हाई रिस्क जोन पांच व चार के अंतर्गत आने वाले 50 शहरों को लिया गया है।

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परियोजना के तहत इन 50 शहरों को भूकंप के खतरे के लिहाज से भौतिक, सामाजिक, आर्थिक और अन्य मानकों पर परखा जाएगा। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की इस परियोजना के तहत चुने गए शहरों में से 10 में प्रोजेक्ट टीम स्वयं स्थलीय निरीक्षण कर जरूरी जानकारी जुटाएगी। इन 10 शहरों में उत्तराखंड के दो शहर उत्तरकाशी व हरिद्वार शामिल हैं। अन्य शहर में मंडी, भुज, पोर्टब्लेयर, अगरतला, अमृतसर, गंगटोक, दार्जीलिंग और बरेली हैं।

प्रोजेक्ट में शामिल अन्य 40 शहरों का पूर्ण ब्योरा एक निश्चित प्रारूप पर संबंधित एजेंसियां उपलब्ध कराएंगी। यह प्रारूप आइआइटी हैदराबाद की ओर से तैयार किया गया है। इन 40 शहरों में जोन पांच में शामिल उत्तराखंड के चमोली व जोन चार के अंतर्गत आने वाले देहरादून व नैनीताल को भी अध्ययन के लिए लिया गया है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा इस संबंध में राज्य के मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह को एक पत्र भेजा गया है। पत्र में अनुरोध किया गया है कि जिन शहरों में एनडीएमए की प्रोजेक्ट टीम स्थलीय निरीक्षण करेगी, वहां संबंधित जिलाधिकारियों को टीम के साथ बैठक करने और जरूरी जानकारी मुहैया कराने के लिए निर्देशित किया जाए। शेष 40 शहरों से संबंधित जरूरी जानकारी भी जिलाधिकारियों के माध्यम से एनडीएमए को उपलब्ध कराने की अपेक्षा की गई है।

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