शीत की गिरफ्त में उत्तराखंड, चंपावत में ठंड से एक की मौत

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मौसम की बदली करवट के साथ ही उत्तराखंड में हुई बर्फबारी ने लंबे समय से बर्फ की आस लगाए बैठे सैलानियों की बांछें खिला दीं। सरोवरनगरी नैनीताल हो या फिर पहाड़ों की रानी मसूरी, बर्फ का दीदार करने के लिए रविवार को सैलानियों का हुजूम उमड़ पड़ा। दोनों ही शहर पूरी तरह से पैक हैं। मसूरी की ही बात करें तो मसूरी-बुरांसखंडा के बीच करीब 10 किमी लंबा जाम लगा रहा। शाम को पर्यटकों के लौटने का क्रम शुरू हुआ तो देहरादून तक बार-बार जाम लगता रहा।
बर्फबारी व बारिश से दुश्वारियां भी बढ़ी हैं। समूचा सूबा शीत लहर की गिरफ्त में है। चंपावत में ठंड से खाद्य विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की मौत हो गई। ठंड से मृत्यु का यह पहला मामला है। भारी हिमपात के कारण बंद हुए मसूरी-चंबा, हर्षिल-गंगोत्री व थल-मुनस्यारी मार्ग दूसरे दिन भी नहीं खुल पाए। इससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उधर, मौसम विभाग की मानें तो सोमवार को मौसम साफ रहेगा, लेकिन बर्फीली बयार बरकरार रहेगी।
सूबे में शुक्रवार से शुरू हुआ बारिश-बर्फबारी का सिलसिला कुछ क्षेत्रों में रविवार तड़के तक बना रहा। चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री के साथ ही राज्य की लगभग चोटियों ने बर्फ चादर ओढ़ी हुई है। नैनीताल, मसूरी, चकराता समेत अन्य पर्यटक स्थलों में बर्फबारी का लुत्फ लेने के लिए शनिवार से ही सैलानियों का जमावड़ा लगा हुआ है। रविवार को तो भीड़ खासी बढ़ गई।
हालांकि मुसीबत भी कम नहीं है। उत्तरकाशी जिले में 37 गांवों की बत्ती गुल है, जिस कारण लोगों को अंधेरे में ही रात गुजारनी पड़ रही है। इसके अलावा हर्षिल-गंगोत्री मार्ग राड़ी टॉप, चैरंगीखाल के पास बंद है। मसूरी-चंबा मार्ग भी भारी बर्फबारी से बंद है और अनुमान लगाया जा रहा कि इसके खुलने में कम से पांच-छह दिन का वक्त लगेगा।

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