उत्तराखंड में लोक निर्माण विभाग का गजब खेल, मानचित्रकारों को बना दिया कनिष्ठ अभियंता प्राविधिक

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(हरीश कंडारी)

उत्तराखंड में लोक निर्माण विभाग का गजब घोटाला सामने आया है विभाग ने सभी नियम-कानूनों को ताक पर रखकर 43 मानचित्रकारों की पदोन्नति कनिष्ठ अभियंता प्राविधिक के पद पर कर दी और इसके लिए उसने न तो लोक सेवा आयोग का अनुमोदन लिया और न ही शासन की अनुमति ली, जो कि नियमानुसार गलत है।

अब जब मामला सामने आया है तो विभाग नियम-कानूनों की जानकारी न होने का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ रहा है। जबकि, सूत्रों के अनुसार इसमें बहुत बड़ा खेल खेला गया है।
गौरतलब है कि लोक निर्माण विभाग में मानचित्रकारों के लिए कनिष्ठ अभियंता प्राविधिक के पद पर पदोन्नति के लिए कोटा निर्धारित किया गया है। अब चूंकि, यह पद सीधी भर्ती के हैं, इसलिए नियमावली में साफ है कि विभाग को पदोन्नति से पहले लोक सेवा आयोग की अनुमति लेना जरूरी है।

और जरूरी होने पर मुख्य अभियंता केवल एक वर्ष के लिए बिना आयोग के परामर्श के पदोन्नति कर सकता है। लेकिन, इस मामले में लोक निर्माण विभाग वर्ष 2007 से 2014 तक आयोग से अनुमोदन लिए बिना लगातार पदोन्नति करता रहा। ऐसे में एक वर्ष के बजाए इन अभियंताओं को कई साल काम करते हुए हो गए हैं। मामला खुलने के बाद शासन स्तर से हुई जांच में भी पदोन्नतियों को नियम विरुद्ध करार दिया गया, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नही हुई है।

मामले में विभाग का जबाव भी हैरत में डालने वाला है। विभाग ने जांच के बाद शासन को जो आख्या प्रस्तुत की, उसमें कहा गया है कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश शासन में कुछ ऐसी पदोन्नतियां हुई थीं। उत्तराखंड बनने के बाद इस संबंध में जो भी नियमावली बनी उसकी जानकारी उन्हें नहीं थी। जबकि, कनिष्ठ अभियंता सिविल, प्राविधिक, विद्युत, यांत्रिक सेवा नियमावली-2007 और पूर्व में जारी सार्वजनिक नियमावली-1968 के स्पष्ट उल्लेख है कि मानचित्रकार से कनिष्ठ अभियंता प्राविधिक के पद पर पदोन्नति किए जाने के लिए लोक सेवा आयोग का अनुमोदन जरूरी है। इस बात की पुष्टि जांच समिति ने भी की है। ऐसे में विभाग का यह कहना कि उसे नियमों की जानकारी नहीं थी, कहना हास्यापद होने के साथ-साथ इस मामले में किसी बड़े खेल की ओर भी इशारा करता है।

कब-कब हुई पदोन्नतियां
2007, 03
2008, 01
2009, 01
2011, 21
2013, 15
2014, 02

नियमावली की जानकारी न होने के कारण ऐसा हुआ है
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता एचके उप्रेती ने बताया कि उत्तर प्रदेश के समय इस प्रकार की पदोन्नति हुई थी। इसके बाद उत्तराखंड में क्या नियमावली बनी, इसकी जानकारी न होने के कारण ऐसा हुआ। अब लोक सेवा आयोग को अनुमोदन के लिए फाइल भेजी जा रही है।

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