ग्रामीणों ने देवता के डर से तोड़े गांव के शौचालय

उत्तरकाशी जिले में डुंडा तहसील के न्याय पंचायत भेटियारा का यह मामला है। यहां स्वच्छ भारत मिशन की स्थिति सबसे निचले पायदान पर है। इस क्षेत्र में ग्राम सभा उडरी और सिरी दो गांव ऐसे हैं, जहां लगभग पांच सौ परिवार रहते हैं। इन गांवों में शौचालय का निर्माण किया जाना है, लेकिन लोगों में भ्रांति फैली है कि शौचालय बनाने पर यहां के ईष्ट देवता जाख देवता नाराज हो जाते हैं।

मामला तब सामने आया जब गांव में शौचालय बनाने वाले लोगों पर देव दोष लगने की बात सामने आई। इसी भय से लोगों ने अपने शौचालय तुड़वा दिए। ग्रामीणों की मानें तो ईष्ट देवता उनको शौचालय बनाने की अनुमति नहीं देते हैं। ग्रामीण अब गांव से कुछ दूर अपने खेतों में नए मकान बना रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय न होने पर उनके रिश्तेदार एवं सगे संबंधी घर पर आने से कतराते हैं। इसलिए नए घर को गांव से कुछ दूर बना रहे हैं, ताकि देवता के प्रकोप से बच सकें। उधर, स्वजल परियोजना के अधिकारी और परियोजना निदेशक ने ग्रामीणों के साथ बैठक की है। गांव में सीवर लाइन डलवाने पर ग्रामीण राजी हुए हैं।

दर्जनों परिवारों ने तोड़ दिए शौचालय  स्थानीय निवासी प्रेम सिंह रावत का कहना है कि गांव में देवता के दोष के कारण एक दर्जन से अधिक परिवारों ने अपने शौचालय तोड़ दिये। कहा कि शौचालय निर्माण पर देवता का दोष होता है। जिसके कारण कई गांव में लोगों के शौचालय बंद करने के साथ ही तोड़ दिए हैं।

रिश्तेदारों को उठानी पड़ती है परेशानी  बीडीसी मेम्बर पूरण सिंह ने कहा कि शौचालय न होने के कारण ग्रामीणों को खुले में ही शौच करने के लिए दूर-दराज जाना पड़ता है। इसी कारण गांव में रिश्तेदार भी गांव में नहीं आते हैं। जिसमें उनको परेशानी उठानी पड़ती है। यदि स्वच्छ भारत मिशन की मुहिम रंग लाती है तो ग्रामीणों को काफी फायदा होगा।

 ग्रामीणों की भ्रांति दूर करने के प्रयास  पर्यावरण विशेषज्ञ स्वजल एसएस चैहान का कहना है कि ग्रामीणों की भ्रांति को दूर करने के लिए ग्रामीणों के साथ सोमवार को परियोजना निदेशक के साथ गांव का निरीक्षण किया जाएगा। वहीं ग्रामीणों की समस्याओं एवं शौचालय निर्माण पर बनी भ्रांति को दूर करने के लिए विचार किया जाएगा।

 

 

 

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