विनोद खन्ना की आखिरी ख्वाहिश, जो रह गई अधूरी

18216956_1836058123385500_172501614_n



नई दिल्ली।  हिंदी सिनेमा के दिग्गज और राजनीति के क्षेत्र में अपना सिक्का जमाने वाले अभिनेता विनोद खन्ना पाकिस्तान के पेशावर स्थित अपने पुश्तैनी घर को देखना चाहते थे, लेकिन उनकी यह ख्वाहिश पूरी नहीं हो सकी।

कैंसर से जंग लडते हुए आखिरकार गुरुवार को अभिनेता विनोद खन्ना ने मुंबई के एक अस्पताल में आखिरी सांसे ली थी। वह 70 वर्ष के थे। आपको बताते चलें कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत में सांस्कृतिक धरोहर परिषद के महासचिव शकील वहीदुल्ला ने 2014 में अपनी भारत यात्रा के दौरान खन्ना से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा, अपने ऑटोग्राफ में खन्ना ने पेशावर के लोगों को शुभकामनाएं दी थीं और अपने पुश्तैनी शहर की यात्रा करने की इच्छा जताई थी। वहीदुल्ला ने बताया कि खन्ना उस इलाके को देखने के लिए पेशावर जाना चाहते थे जहां उनके माता-पिता और पूर्वज रहे थे। उन्होंने पाकिस्तान की यात्रा करने के लिए आग्रह किया था, लेकिन उनको इसमें सफलता नहीं मिल सकी।

उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक धरोहर परिषद जल्द ही खन्ना के सम्मान में एक कार्यक्रम का आयोजन करेगा। गौरतलब है कि विनोद खन्ना का जन्म 7 अक्टूबर, 1946 में पेशावर, पाकिस्तान में हुआ था लेकिन विभाजन के बाद इनका परिवार मुंबई आकर बस गया था। इनके पिता किशनचन्द्र खन्ना एक बिजनेसमैन रहे हैं और माता कमला खन्ना एक गृहणी रहीं।

विनोद खन्ना ने हिन्दी फिल्म जगत की कई हिन्दी फिल्मों जैसे मेरे अपने, कुर्बानी, पूरब और पश्चिम, रेशमा और शेरा, हाथ की सफाई, हेरा फेरी, मुकद्दर का सिकंदर में शानदार अभिनय किया। विनोद खन्ना का नाम ऐसे एक्टर्स में शुमार था जिन्होंने शुरुआत तो विलेन के किरदार से की थी लेकिन बाद में हीरो बन गए।

 

 

Facebook Comments

Random Posts