मतदाता अब ईवीएम से वोट देने के बाद स्क्रीन पर देख सकेंगे अपना वोट

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उत्तराखंड चुनाव 2017 में निर्वाचन आयोग मतदाताओं की जिज्ञासा शांत करने के लिए विशेष व्यवस्था करने जा रहा है, इस व्यवस्था के चलते आगामी विधानसभा चुनाव में मैदानी क्षेत्रों के कई बूथों के मतदाता वोट डालने के साथ ही मशीन की स्क्रीन पर देख सकेंगे की उन्होंने अपना वोट किस प्रत्याशी या पार्टी को दिया है। निर्वाचन आयोग यह नया प्रयोग इसलिए करने जा रहा है कि क्योंकि कई बार ईवीएम से मतदान करने के बाद कई मतदाता को जानने की इच्छा/जिज्ञासा होती है कि उसका वोट सही जगह पड़ा है या नहीं।

उत्तराखंड में पहली बार यह व्यवथा की जा रही है जिसके तहत मैदानी क्षेत्रों के मतदाता ईवीएम से वोट देने के बाद अलग से लगी एक मशीन के स्क्रीन पर चंद समय के लिए अपना वोट देख सकेंगे। हालांकि, ईवीएम अपने आप में विश्वसनीय व सटीक मशीन है, जिसमें चुनाव चिन्ह के सामने वाला बटन दबाने पर संबंधित प्रत्याशी को ही वोट पड़ता है। वहीं, मतदान शुरू होने से पहले हर पोलिंग स्टेशन पर मॉक पोलिंग की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। यदि कोई मशीन मॉक पोलिंग में गलत गणना बताती है तो ऐसी मशीनों को तत्काल बदलने का प्रावधान है।

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका के बाद निर्वाचन आयोग ने ईवीएम के साथ वोटर वैरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपेट) मशीन लगाने का निर्णय लिया है। उत्तराखंड के मैदानी जिलों के पोलिंग बूथों पर इसे प्रयोग के तौर पर लगाया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतूड़ी ने बताया कि ईवीएम से मतदान के बाद यदि कोई मतदाता जानना चाहता है कि उसका वोट सही जगह पड़ा या नहीं तो वह वीवीवेट मशीन का बटन दबाकर यह देख सकता है। बटन दबते ही स्क्रीन पर यह दिख जाएगा और संबंधित पर्ची सीलबंद डिब्बे में चली जाएगी।

1 अक्तूबर से 31 अक्तूबर तक विशेष अभियान
वोटर बनने के लिए उत्तराखंड में एक अक्तूबर से 31 अक्तूबर तक विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है, और 31 अक्तूबर तक चलने वाले इस अभियान में नए मतदाताओं पर फोकस किया जाएगा। एक जनवरी, 17 को 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले युवा इस अभियान में वोटर बन सकते हैं। बीएलओ घर-घर जाकर ऐसे मतदाताओं को तलाशेंगे। इसके अलावा ऐसे व्यक्ति जो अभी भी वोटर बनने से वंचित हैं, वे भी फॉर्म छह भरकर आवेदन कर सकेंगे। इन सभी को जनवरी माह में मतदाता पहचान पत्र आवंटित किए जाएंगे।

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