स्मार्टफोन से क्या नुकसान हैं पढ़ें


स्मार्टफोन पर देर रात यारी आंखों पर पड़ेगी भारी
कभी चैटिंग, कभी गेमिंग तो कभी विडियो कॉलिंग। स्मार्टफोन पर हमारी निर्भरता इस कदर बढ़ी है कि बिना इसके इस्तेमाल के न तो दिन गुजरता है और न रात में नींद आती है। हालांकि, देर रात तक लाइट बंद कर मोबाइल स्क्रीन पर नजरें गड़ाना आंखों को काफी नुकसान पहुंचा रहा है। इससे न सिर्फ ड्राई आइज की समस्या होती है बल्कि लोगों की आंखें कमजोर भी हो रही हैं। डॉक्टर्स की मानें तो हर दिन ओपीडी में 20 प्रतिशत मरीज इस तरह की शिकायत लेकर आते हैं। आगे की तस्वीरों में जानें, मोबाइल पर लंबा वक्त बिताने की यह आदत किस तरह सभी उम्र के लोगों को नुकसान पहुंचा रही है…
डॉ उमेश कुमार सोनकर कहते हैं कि बच्चे ही नहीं बड़े भी मोबाइल पर घंटों वक्त बिताते हैं। अक्सर रात में लाइट्स बंदकर चैंटिंग या विडियो देखने की आदत आंखों पर बुरा असर डालती है। जब लोग हमारे पास कम दिखने जैसी शिकायत लेकर आते हैं तो हम उनका शेड्यूल पूछते हैं। ऐसे में अक्सर लोग मोबाइल पर लंबा वक्त बिताने की बात छिपाते हैं। वे यह नहीं बताना चाहते कि वे देर रात तक मोबाइल पर चैट करते हैं। इसकी बजाय वे दूसरे कारण गिनाने लगते हैं।
डॉक्टर सोनकर कहते हैं कि इस तरह के मरीजों को वह चश्मा लगाने की सलाह देने के बजाय आईड्रॉप की मदद से ठीक करने पर जोर देते हैं। इस तरह के केस में पेशंट्स 15 दिन से लेकर एक महीने में नॉर्मल आईसाइट के लेवल पर आ जाते हैं। हालांकि, इस तरह के पेशंट्स को डॉक्टर्स चेतावनी देते हैं कि अगर वक्त रहते वे

अपनी आदत (लाइट बंद कर मोबाइल पर चैटिंग) पर काबू नहीं पाते हैं तो उनके लिए यह खतरनाक साबित हो सकता है।
लोकबंधु अस्पताल की डॉ स्नेहलता कहती हैं एक वक्त के बाद आंखें थक जाती हैं लेकिन हम फिर भी थकी हुई आंखों से काम लेते रहते हैं। यही असली दिक्कत है। रात में मोबाइल इस्तेमाल करते वक्त जब लाइट्स भी बंद कर दी जाती हैं तो स्क्रीन से निकलने वाली किरणें सीधे आंखों पर पड़ती हैं जिससे वे प्रभावी ढंग से काम करना बंद कर देती हैं। डॉ स्नेहलता कहती हैं कि उनके पास हर ओपीडी में 20 से 30 ऐसे मरीज आते हैं, जो आइज ड्राइनेस का शिकार होते हैं या फिर देर रात तक स्मार्टफोन इस्तेमाल करने की वजह से आंखों में दर्द से लेकर कम दिखने की शिकायत करते हैं। आइज ड्राइनेस के लिए एसी भी कुछ हद तक जिम्मेदार होता है।
यंगस्टर्स अक्सर देर रात तक फॉल्टी पोजीशन (लेटना या गलत ढंग से बैठना) में स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। अंधेरे कमरे में स्मार्टफोन की स्क्रीन पर टकटकी लगाए रखने की वजह से अक्सर उन्हें आंखों में इचिंग, ड्राईआइज और आंखें लाल होने की समस्या होती है। ओपीडी में आने वाले इस तरह के पेशंट्स में ज्यादातर 20 से 40 साल की उम्र के होते हैं। मोबाइल का प्रभाव बढ़ते बच्चों पर ज्यादा होता है, जिससे आईसाइट कमजोर होती है। ऐसे पेशंट्स को खासतौर पर फोन का इस्तेमाल कम करने की सलाह दी जाती है।

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