मेरी हत्या क्योँ करवाना चाहती है हरीश सरकार?

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शिव  प्रसाद   सती

मेरी हत्या क्योँ करवाना चाहती है हरीश सरकार?

ये किसी फिल्म की कहानी नहीं हरीश रावत राज मैं जनता की चुनी हुयी सरकार की कहानी है जब चौथा स्तंभ कही जाने वाली पत्रकारिता के लोग ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम आदमी का क्या कहना?३० तारीक को मुझे पुलिस सारे आम २०० मीटर तक घसीट कर लर ले गयी और उसके बाद डालनवाला थाना ले जाया गया और मेरा सारा सामान रखवा दिया और उसके बाद मेरे जूते खुलवाए और मुझे हवालात मैं डाल दिया उसके बाद  sho यशपाल सिंह बिष्ट अन्दर मेरे साथ मिर्ममता से हाथापाई करने लगा और साथ मैं ओमबीर चौधरी si और दो लोग मुझ पर लगातार मारते रहे मुझ पर कम से कम कानून के रखवाले sho ने मुझ पर 12 घुसे और 5 लात थाने के लॉक अप मैं मारे ?  मुझे २ घंटे हवालात मैं रखा और उसके बाद मुझे बाहर आने को कहा और उसके बाद मुझे कोरोनेशन अस्पताल स्वास्थ्य परीक्षण के लिए ले जाया गया ? उसके बाद सी ऍम कार्यालय गए और मुक्यमंत्री हरीश  रावत  ने ससपेंड करने से मना कर दिया उसके तुरंत बाद दून अस्पताल गया और दोवारा स्वास्थ्य परीक्षण कराया लेकिन अब भी हरीश रावत सरकार चुप है ?? यह एक शर्मनाक मामला है। सरकार ऐसे दमनकारी षडयंत्र से किस किस को रोक पाएगी। इनका लोकतंत्र में विश्वास नहीं है तानाशाही ही हरदा का हथियार रहा है अगर ऐसा न होता तो दल के विधायक मंत्री सरकार से अलग न हुए होते, थोड़े दिनों की बात है इस आतंक को उचित जबाब मिलेगा। खाकी शासन के आधीन हे,जैसा आदेश मिलता है ,वो उसका पालन करते हे,इसमे दोषी शासक हे,खाकी नही। विनाश काले विपरीत बुद्धि।अकसर जब किसी अन्त निकट आता है तो वह वो काम करता है जो उसके विनाश का कारण बनता ।शायद वो ये नी जानते है कि कलम की धार तलवार की धार से कई गुना तेज होती है किसके आदेश पर लाठीचार्ज किया गया ? एसएचओ के खिलाफ कोर्ट के माध्यम से हत्या की साजिश रचने का मुकदमा दर्ज कब किया जायेगा जबकि देहरादून एस पी कार्यालय मैं शिकायत की गयी है ? लेकिन हरीश रावत सरकार चुप है ?ऐसी कौन सी अराजक स्थिति उत्पन्न की जा रही थी निहत्थे hoपत्रकारों द्वारा ?पत्रकारों से हरीश रावत को किस बात का खतरा ? लेकिन हवालात के अन्दर पिटाई क्यों ? बीते हुए साल के आख़िरी दिनों में पत्रकारों की जिस तरह से पुलिस ने निर्ममता से पिटाई की, उससे एक बात तो साफ़ हो गई गई है कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ ख़तरे में है। ख़ुद पत्रकार बिरादरी के लोग पत्रकारों की पिटाई देखकर परपीड़क सुख का अनुभव कर रहे हैं। सत्ता प्रतिष्ठान तो जश्न में ही डूबा है। हालाँकि बहाना नए वर्ष का है। पत्रकारिता अब ताक़त और पैसे का खेल मानी जाती है। मीडिया पर हमले वही करते या करवाते हैं, जो अनैतिक और बुरे काम में डूबे रहते हैं। इन लोगों का चरित्र दोहरा होता है।ऊपर से सफ़ेदपोश और अंदर से काले-कलुषित। धन बल और सत्ता बल की आड़ में ही ऐसे हमले होते हैं। मुझे इस बात का अफ़सोस है कि पत्रकारो में एका नही है। यहाँ भी राजनीति घुस आई है। लोकतान्त्रिक व्यवस्था द्वारा प्रदत्त शक्तियों के दुरूपयोग के अपराधी कौन हैं ? . अपराधियों के ऊपर सत्ता और कानून के दुरूपयोग का मुकदमा दर्ज हो ।उत्तराखंड में खाखी की तानाशाही और बर्बरता. लोक्ततंत्र के चौथे महत्वपूर्ण स्तम्भ के सिपाही और लोकतंत्र के रक्षक, समाज के पहरेदार पत्रकार बंधुओं पर भी जमकर लाठियां बरसाई. और ये मैं नहीं कह रहा, तसवीरें खुद ब खुद हकीकत बयां कर रही हैं.
लाठीचार्ज में शामिल शासकीय कर्मचारी तत्काल निलंबित हों ।पत्रकारों पर लाठी चला कर सरकार ने अपनी नपुंसकता का परिचय दिया है,हमारी लेखनी और कैमरा बहुत भारी पड़ेगा चुनाव नजदीक है,जनता कुकृत्य देख रही है प्रेस क्लब मैं विरोध कर रहे पत्रकारों पर लाठी , ठंडो और लात से सारे आम पिटाई हुयी लेकिन हरीश रावत सरकार अभी भी चुप है ? राजधानी मैं प्रेस क्लब मैं जबरन चुनावों मैं संगीनों के साये मैं जिस तरह चुhardaddनाव हुए हैं मीडिया अगर कोई गैर कानूनी काम कर रही है तो उसके लिए न्यायपालिका है , न कि अमानवीय हिंसक बर्बरता।जिसे लोकतंत्र का चौथा सतंभ माना जाता है उसकी हरदा की सरकार खुलेआम पीटा है जब शंखनाद टुडे ने एस एस पी का कहना भी सुनिए की जैसे आप लोग सबूत रखते हैं वैसे ही अप देख लीजिये अगर हवालात के अन्दर पिटाई हुयी है है तो विडियो होगा आपके पास लेकिन हवालात के अन्दर डालने से पहले सारा सामान जमा करवा दिया जाता है तो विडियो कहा से आयगा अब बस करो बस कुछ यूँ बयाँ किया है….. लेकिन हरीश रावत के ये सरकारी गुण्डों कितने को पीटेंगे कि खाकी वरदी वालों से खून की बदबू आती है?फिलहाल मुझे न्याय मिलेगा या नही यह अभी भविष्य के गर्व हैं मैं अपने स्वास्थ्य परीक्षण और एस एस पी कार्यालय का पत्र भी संलग्न कर रहा हू?लेकिन मेरा भी वादा है सच जिन्दा रहेगा ?

 

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