योगी का वादा, रह गया आधा

 

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एस के तिवारी

देहरादून। सत्ता सँभालने  के बाद उप्र के मुख्यमंत्री ने कैबिनेट की पहली बैठक में लिए गए फैसले से भले ही प्रदेश के करीब 2.15 करोड़ किसानों को कर्ज में रहात देना वाला फैसला लेकर खूब वाह-वाही बटौरी है, लेकिन इसे भी अधूरा ही सच कहा जाएगा। दूसरे शब्दों में योगी ने आधा वादा ही निभाया है।

योगी के फैसले से उन किसानों को ही लाभ मिलेगा जो पढे़ – लिखे हैं, जिनक पास अधिक भूमि है, संसाधन बाहुल्य हैं तथा पहले से ही संपन्न हैं। उनके द्वारा खेती किसानी के लिए ऋण लेना महज एक औपचारिकता रहती है। जो यदा-कदा बैंक या राजस्व विभाग को दर्शायी जाती है या तो अन्य कोई लोन

ग्रहण करने में सहायक होती है। असली दर्द तो उन किसानों का है, जो आज भी खेती की सिंचाई के लिए प्राकृतिक वर्षा, सरकारी टयूबबेल या सरकार द्वारा निर्धारित समय पर नहर द्वारा छोडे गए पानी पर निर्भर रहती है। उन छोटे किसानों को तो काई बैंक भी लोन देने को तैयार नहीं होता है। भूले-भटके यदि कोई किसान बैंक की चैखट पर पहुंच भी जाता है, तो उसे इतने नियम-कानून बता दिए जाते हैं कि वह उल्टे पांव अपने घर की ओर आ जाता है। ऐसे किसानों के लिए माई-बाप आज भी गांव के बडे़ साहुकार एंव जमीनदार ही है। इन छोटे किसानों की खेती इन्हीं साहूकारों एंव जमीनदारों के रहमों कर्म पर निर्भर रहती है। इसमें तनिक भी संदेह नहीं है कि इन छोटे किसानों का अनपढ़ होना इनके पिछडे़पन का मुख्य कारण हैं। लेकिन वो करे भी तो क्या करे। अपना पढे़ या अपने बच्चों को पढाए, मजदूरी करके अपना घर-परिवार चलाए या बैंक या जिले के अधिकारियों के चक्कर लगाए। सरकार के बडे़-बडे़ दावे और वायदे इनकी चैखट से आज भी कोसों दूर हैं। साथ ही सरकार भी उन्हीं किसानों के ऋण माफ करती है, जो अधिकारिक तौर पर सरकारी दस्तावेजों या बैंकों में किसी भी रुप में कागजों में दर्ज हैं। उन ऋणों का क्या होगा, जो आज भी सादे कागजों पर लिए और दिए जाते हैं। इन ऋणों को अधिकारिक तौर पर मान्यता कब मिलेगी। छोटे किसान इन सफेद कागजों के कारावास से कब आजाद होंगे। यह सवाल आज भी आजादी के छः दशक बाद जस का तस ही है।
सीएम योगी आदित्यनाथ का बयान जो शायद उन्होंने मुख्यमंत्री आवास में गृहप्रवेश के समय कहे थे, आज बर्बस बार-बार याद आ रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि  वे प्रदेश की गलियों से लेकर सडक तक के रास्ते से वाकिफ हैं। उन्हें हर उस मौसम के मिजाज का पता है जिससे एक आम अदमी रु-ब-रु होता है। इस बात को शायद योगी कुर्सी पर बैठने के बाद भूल गए।

गौरतलब है कि पहली कैबिनेट बैठक में प्रदेश के छोटे और मझोले किसानों का एक लाख रुपये तक का फसली ऋण माफ कर दिया गया है। इससे करीब 2.15 करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलेगा। तथा इस पर सरकार 30 हजार 729 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

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